मंगलवार, 25 अगस्त 2009

भाजपा में टूट से राजग में फूट का खतरा



लगता है भाजपा में अंदरूनी कलह का असर राजग पर भी पड़ने लगा है। गठबंधन पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। हरियाणा में ओमप्रकाश चौटाला के नेतृत्व वाले इंडियन नेशनल लोक दल [इनेलोद] से पार्टी का गठबंधन लगभग टूट ही गया है। अकाली दल, जद-यू, शिवसेना गोरखा जनमुक्ति मोर्चा ने भी तेवर दिखाने शुरू कर दिए हैं। हालात ऐसे हैं कि अजित सिंह का राष्ट्रीय लोकदल गठबंधन के बाहर की सहयोगी असम गण परिषद भी नए रास्ते तलाश सकते हैं। भाजपा की मुसीबत यह है कि वह सहयोगियों को साधे या फिर अपने घर में हो रहे धमाकों को रोके।
वरिष्ठ नेता जसवंत सिंह के निष्कासन, सुधींद्र कुलकर्णी के भाजपा से नाता तोड़ने और अब अरुण शौरी की बगावत का असर यह हुआ कि राजग में उसके कनिष्ठ सहयोगी भी भाजपा को आंखे दिखाने लगे हैं। जसवंत ंिसंह की जिन्ना पर लिखी किताब पर प्रतिबंध लगाने की भाजपा की इच्छा को उसके सहयोगी दलों ने नकार दिया है। जद-यू अकाली दल ने दो टूक कहा है कि वे जिन्ना पर लिखी किताब पर प्रतिबंध लगाने के पक्ष में नहीं हैं। इन दोनों दलों की भाजपा के साथ बिहार पंजाब में गठबंधन सरकारें हैं।
हरियाणा में तो भाजपा की मुसीबत बढ़ ही गई है। राज्य में अक्टूबर में विधानसभा चुनाव होने हैं और उसके पुराने आजमाए हुए सहयोगी ओमप्रकाश चौटाला के नेतृत्व वाले इनेलोद के साथ सीटों का तालमेल गड़बड़ा गया है। नाराज भाजपा ने गठबंधन तोड़ने का एकतरफा ऐलान भी कर दिया है। हालांकि चौटाला गठबंधन को बचाने की कोशिश कर रहे हैं।
महाराष्ट्र में भी मौके का फायदा उठाते हुए शिवसेना ने भाजपा पर दबाव बनाना शुरू कर दिया है। उसने राज्य विधानसभा चुनाव के दौरान संयुक्त प्रचार अभियान के लिए नई शर्त जोड़ दी है। दोनों दलों ने तय किया था कि राज्य में सभी प्रचार वाहनों पोस्टरों पर शिवसेना प्रमुख बाल ठाकरे भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी के फोटो होंगे। अब शिवसेना चाहती है कि इन दो नेताओं के साथ तीसरा फोटो उसके कार्यकारी अध्यक्ष उद्धव ठाकरे का भी होना चाहिए।
लोकसभा चुनाव में साथ आए गोरखा जन मुक्ति मोर्चा ने भाजपा से जसवंत सिंह को बाहर किए जाने के बाद पूछा है कि उनकी गोरखालैंड की मांग अब कौन उठाएगा? अपने घमासान में उलझी भाजपा के पास इस समय इसका जवाब देने की फुर्सत नहीं है।

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